आत्महत्या के विरुद्ध
यूएनआई के सभी साथिओं से आग्रह है क़ि वे अपनी संस्था और इसके किसी भी सहयोगी के बारे में कहीं भी कोई टीका टिपण्णी करने के दौरान तथ्यपरकता और शालीनता का व्यवहार करें 1
हाल के दिनों में एक वेब पोर्टल पर यूएनआई और इसमें कार्यरत सहयोगिओं के बारे में कई तथ्यहीन और अनर्गल कमेन्ट नज़र आये हैं १इस तरह के कमेन्ट हमारी कमजोरी दर्शाती हैं और हमें यूएनआईको बचाने के हमारे आन्दोलन के मूल लक्ष्य से भटकाती हैं ये कमेन्ट पूरे माहौल को विषाक्त बना रहे है
संस्था व्यक्ति से बड़ी होती है १ हम यह मानते है क़ि यूएनआई का हर कर्मचारी वेतन मिलने में पांच पांच माह की देरी और अन्य सम्बंधित कारणों से तनाव में काम कर रहा है और इस कारण यह अस्वाभाविक नहीं क़ि
उनका व्यवहार दफ्तर ही नहीं घर में भी असामन्य नजर आये . इसलिए यूएनआई प्रबंधन को ही नहीं हमारी युनियन के भी नेतृत्व को संयम और धैर्य से कार्य करना होगा ताकि सभी कर्मचारी तनाव कम कर अपेक्षित कार्य और मार्यादित व्यवहार कर सकें
प्रधानमन्त्री सरकार और नागरिक समाज के जिन लोगों से हम कर्मचारिओं ने अपने आन्दोलन में मदद मांगी है वो हमारी आपसी लड़ाई के बारे में पढ़ सुन कर हमसे किनारा कर लें तो उन्हें हम दोष नहीं दे पाएंगे
हमारा आन्दोलन साकारात्मक है हम नाकारात्मक नजर से आपस में ही लड़ने झगड़ने लगें तो फिर यूएनआई को बचाना मुश्किल ही नहीं असंभव हो जायेगा 1 यह वही वेब पोर्टल है जिसने हमारे संसद मार्च क़ी दी खबर को हमारे अनुरोध के बावजूद खबर नहीं माना १ उसने बिना किसी छानबीन के यूएनआई के बारें में नकारात्मक खबरें और उन पर अनर्गल ही नहीं अश्लील टीका टिपण्णी प्रकाशित कर दी
उसकी नवीनतम खबर में मुंबई के जिस कर्मचारी के मुकदमें को फर्जी बताते हुए उसको मुख्य शीर्षक देकर छापा है वो किसी गलत इरादे से दी गयी उस गलत खबर को विश्वसनीय बनाने क़ी एक बचकानी कोशिश है १ वो मुकदमा प्रबंधन ने नहीं खुद उस कर्मचारी ने किया था १ उसके पक्ष में न्यायालय के अस्थगन आदेश आ जाने के बाद प्रबंधन पहले से बैकफुट पर है और उस कर्मचारी का उत्पीडन बंद करने के लिए यूएनआई बोर्ड क़ी इसी वर्ष पांच जनवरी को मुंबई में ही हुई बैठक के बाद पहल क़ी जा चुकी है.
यूएनआई के बारें में इस वेब पोर्टल क़ी जिन ख़बरों में अगर सच्चाई है भी तो वो हम पहले से जानते हैं १ हम कर्मचारिओं का खुद का उस वेब पोर्टल से काफी पहले से चल रहा यह मुख्य ब्लॉग हैं और मुंबई , दिल्ली , चेन्नई कोलकाता क़ी युनियन के भी अपने अपने ब्लॉग हैं जिन पर तथ्यपरक वक्तव्य देने और मर्यादित
टीका टिपण्णी करने क़ी सहज सुविधा प्राप्त है 1 फिर हमारी गेट मीटिंग जीबीएम आदि भी होती रहती है 1 हम कमर के नीचे वार करने में यकीं नहीं रखते और जो भी कहना है पूरी जिम्मेवारी के साथ और सीना ठोंक कर कहते है.
हमें कानून पर भरोसा है और इसलिए कुछ भी गैरकानूनी काम करने से बचते हैं 1 हमारा कानून अश्लील
टीका टिपण्णी करने और किसी पर भी सार्वजनिक रूप से बेसिरपैर के आरोप लगाने क़ी इजाजत नहीं देता है.
मीडिया और उसकी ख़राब हालत के जिम्मेवार लोगों को गालिया देने से काम नहीं चलने वाला है 1 देश में एक बेहतर और जनमुखी मीडिया विकसित करने के लिए ही करीब ५० वर्ष पहले यूएनआई का गठन हुआ था जिसे आत्महत्या के मार्ग पर जाने से रोकने क़ी जिम्मेवारी हम यूएनआई कर्मिओं क़ी सबसे ज्यादा है.
यह यूँ ही नहीं है क़ि दिवंगत कवि रघुवीर सहाय ने अपनी एक कविता का शीर्षक रखा था आत्महत्या के विरुद्ध....
Yashwant Comments
|नीचे जो अपील है, उसे भी कमेंट के रूप में प्रकाशित करा दिया है. दरअसल वेब ब्लाग पर कमेंट कर लोग अपनी बात कहते हैं. संभव है कुछ बातें गलत हों पर वेब ब्लाग एक ओपेन फोरम होते हैं जिस पर कमेंट का आप्शन होता है. हम लोग बहुत कम कमेंट माडरेट करते हैं. ज्यादातर कमेंट, अगर वो बहुत गलत नह हुए तो पब्लिश कराते हैं. आप बताइए, किस कमेंट में क्या चीज हटवाना चाहते हैं, उसको जरूर हटा देंगे. लोगों के दिल में जो कचरा भरा होता है, उसे बाहर आने का मौका मिलना चाहिए, ये उनका लोकतांत्रिक हक है.
आभार के साथ
यशवंत


